सालभर में केवल आज ही के दिन खुलता है ये मंदिर, तीन अलग-अलग समय पर होती है त्रिकाल पूजा

उज्जैन :धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के ऊपरी तल पर बने नागचंद्रेश्वर के पट नागपंचमी के अवसर पर खोले गए। यह मंदिर साल में केवल एक बार 24 घंटे के लिए खोला जाता है। काफी समय से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन आज भी किया जाता है। मंदिर के पट खुलने के बाद दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली है, वहीं महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी ने पट खुलते ही नागचंद्रश्वेर भगवान का पूजन अभिषेक किया।

तीन अलग-अलग समय पर होगी नागचंद्रेश्वर भगवान की त्रिकाल पूजा

महंत विनीत गिरी ने मीडिया से चर्चा में बताया कि नागचंद्रेश्वर भगवान की त्रिकाल पूजा की परंपरा के अनुसार तीन अलग-अलग समय पर होने वाली पूजा का प्रथम पूजन मध्य रात्रि 12:00 पट खोलने के बाद की जाती है। दूसरी पूजा 2 अगस्त की दोपहर 12:00 बजे शासन की ओर से की जाएगी। वहीं तीसरी पूजा शाम 7:30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर समिति और महाकाल मंदिर के पुजारी द्वारा की जाएगी। वही 02 अगस्त की रात 12:00 बजे आरती के पश्चात मंदिर के पट को पुनः 1 वर्ष के लिए बंद कर दिया जायेगे। वहीं 1 दिन के लिए खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई है।

वहीं कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है कि, दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन हो सके इसकी पूरी व्यवस्था की गई है। हमारा यह अनुमान है कि 24 घंटे में लाखों की संख्या में श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन करने पहुंचेंगे। वहीं कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए जिला प्रशासन की ओर से पानी और फरियाल की व्यवस्था की गई है।

महंत द्वारा पूजा के बाद शुरू हुआ श्रद्धालुओं का दर्शन

उज्जैन पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने बताया है कि, महंत द्वारा पूजा के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए प्रवेश दिया गया है। 1 घंटे में 10 हजार के लगभग श्रद्धालुओं ने नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन किए हैं। वही सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से सैकड़ों की तादाद में पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। आपको बता दें कि यह नागचंद्रेश्वर मंदिर वह मंदिर है जिसे लेकर शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि यह आदि काल से स्थापित है और इसके दर्शन मात्र से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है।

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